हरतालिका तीज 2026: 13 या 14 सितंबर? जानें सही व्रत तिथि, पूजा मुहूर्त और पूरी जानकारी

हरतालिका तीज 2026: 13 या 14 सितंबर? जानें सही व्रत तिथि, पूजा मुहूर्त और पूरी जानकारी

हरतालिका तीज 2026 इस वर्ष 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर से शुरू होकर 14 सितंबर को सूर्योदय के बाद समाप्त होगी, जिसके कारण इसकी तारीख को लेकर लोगों में 13 और 14 सितंबर का भ्रम बना हुआ है। आइए जानते हैं हरतालिका तीज की सही व्रत तिथि, तिथि का समय और इससे जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी।

हरतालिका तीज 2026 कब है? 13 या 14 सितंबर का भ्रम:-

हरतालिका तीज हिंदू धर्म के प्रमुख व्रतों में से एक है, जो भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। वर्ष 2026 में हरतालिका तीज की तारीख को लेकर 13 और 14 सितंबर के बीच भ्रम बना हुआ है। इसका मुख्य कारण तृतीया तिथि का समय है वर्ष 2026 में भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर 2026, रविवार को सुबह 7:08 बजे शुरू होगी और 14 सितंबर 2026, सोमवार को सुबह लगभग 7:06 बजे समाप्त होगी। अधिकांश पंचांगों में उदयातिथि के आधार पर हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर 2026, सोमवार को बताया गया है, क्योंकि 14 सितंबर को सूर्योदय के समय तृतीया तिथि विद्यमान रहेगी। राजस्थान सहित उत्तर भारत के लिए प्रमुख पंचांग स्रोत 14 सितंबर को हरतालिका तीज की मुख्य तिथि बता रहे हैं।

13 सितंबर को लेकर भ्रम क्यों है?

13 सितंबर को सुबह सूर्योदय के बाद तृतीया तिथि प्रारंभ हो रही है। इस कारण कुछ स्थानों और पारिवारिक परंपराओं में 13 सितंबर को व्रत रखने की परंपरा मिल सकती है। तिथियों के निर्धारण में अलग-अलग क्षेत्रों में उदयातिथि या विशेष पूजा-काल के नियमों का पालन किया जा सकता है।

व्रत की मान्य तारीख:-

उदयातिथि के आधार पर वर्ष 2026 में हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर, सोमवार को रखा जाएगा। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर को शुरू होकर 14 सितंबर की सुबह तक रहेगी, इसलिए सूर्योदय के समय तृतीया तिथि होने के कारण 14 सितंबर को व्रत रखना मान्य माना गया है।

हरतालिका तीज 2026 पूजा मुहूर्त:-

हरतालिका तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा प्रातःकाल करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है। यदि किसी कारणवश सुबह पूजा करना संभव न हो, तो प्रदोष काल में भी शिव-पार्वती की पूजा की जा सकती है।

हरतालिका तीज 2026 पूजा मुहूर्त:-

सुबह पूजा का समय:-

राजस्थान के जयपुर पंचांग के अनुसार 14 सितंबर 2026 को प्रातःकाल हरतालिका तीज पूजा मुहूर्त सुबह 6:12 बजे से 7:06 बजे तक रहेगा।

प्रदोष/शाम की पूजा:- 

यदि सुबह पूजा न हो सके, तो सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में शिव-पार्वती की पूजा की जा सकती है। अलग-अलग पंचांग और स्थान के अनुसार प्रदोष काल का सटीक समय बदल सकता है, इसलिए Article में अपने शहर के अनुसार समय अलग से जांचकर देना बेहतर रहेगा।

रात में जागरण का महत्व:-

हरतालिका तीज में कुछ परंपराओं में रात्रि जागरण, भजन-कीर्तन और भगवान शिव तथा माता पार्वती का स्मरण किया जाता है। इसे भक्ति और श्रद्धा से जोड़ा जाता है। हालांकि रात भर जागरण हर जगह अनिवार्य नियम नहीं है, बल्कि यह स्थानीय और पारिवारिक परंपरा के अनुसार किया जाता है।

नोट: पूजा मुहूर्त शहर और स्थान के अनुसार बदल सकता है। इसलिए अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

हरतालिका तीज व्रत का महत्व:-

हरतालिका तीज हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण व्रत है, जिसका संबंध भगवान शिव और माता पार्वती के पवित्र मिलन से माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप और व्रत किया था। उनकी अटूट भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसी कारण हरतालिका तीज को प्रेम, श्रद्धा, तप और समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

भगवान शिव और माता पार्वती से संबंध:-

इस व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती ने जिस दृढ़ निश्चय के साथ भगवान शिव की आराधना की, उसी तपस्या की स्मृति में हरतालिका तीज का व्रत रखा जाता है। यह व्रत शिव-पार्वती के आदर्श दांपत्य, विश्वास और समर्पण का संदेश देता है।

सुहाग और वैवाहिक सुख की मान्यता:-

हरतालिका तीज का व्रत मुख्य रूप से अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से रखा जाता है। विवाहित महिलाएं अपने पति के अच्छे स्वास्थ्य, दीर्घायु और परिवार के सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं। वहीं, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अविवाहित कन्याएं भी मनचाहे और योग्य जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रख सकती हैं।

संक्षेप में, हरतालिका तीज केवल एक व्रत नहीं, बल्कि श्रद्धा, प्रेम, विश्वास, त्याग और वैवाहिक जीवन के प्रति समर्पण का पर्व है।

हरतालिका तीज की पौराणिक कथा:-

हरतालिका तीज की पौराणिक कथा माता पार्वती की भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा, प्रेम और कठोर तपस्या से जुड़ी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठिन तप किया था। इसी कथा के कारण हरतालिका तीज को विशेष महत्व प्राप्त है।

हरतालिका तीज की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार माता पार्वती ने बचपन से ही भगवान शिव को अपना पति मान लिया था। भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए उन्होंने कठोर तपस्या और आराधना की। पारंपरिक कथा में बताया गया है कि उन्होंने वन में रहकर भगवान शिव की उपासना की और अन्न-जल का त्याग कर तप किया। कथा के अनुसार माता पार्वती के पिता हिमालय उनका विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते थे। यह जानकर माता पार्वती दुखी हुईं, क्योंकि वह भगवान शिव को ही अपना पति मान चुकी थीं। तब उनकी सखी उन्हें अपने साथ घने वन में ले गई, ताकि माता पार्वती अपनी इच्छा के अनुसार भगवान शिव की तपस्या कर सकें। इसी प्रसंग से हरतालिका नाम की उत्पत्ति मानी जाती है। वन में माता पार्वती ने एक गुफा में भगवान शिव की कठोर आराधना की। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन उन्होंने भगवान शिव की पूजा की और रात्रि में जागरण किया। माता पार्वती की कठोर तपस्या और अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें दर्शन दिए और पत्नी के रूप में स्वीकार करने का वरदान दिया। इसके बाद माता पार्वती के पिता ने भी उनकी इच्छा स्वीकार कर ली और भगवान शिव के साथ उनका विवाह संपन्न हुआ।

यही कारण है कि हरतालिका तीज को प्रेम, तपस्या, अटूट विश्वास और शिव-पार्वती के पवित्र मिलन का प्रतीक माना जाता है।

हरतालिका तीज की पूजा सामग्री:-

हरतालिका तीज की पूजा में भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा की जाती है। परंपरा के अनुसार मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है। पूजा की सामग्री में पूजा-पाठ की सामान्य वस्तुओं के साथ माता पार्वती के लिए सोलह श्रृंगार की सामग्री भी रखी जाती है।


मुख्य पूजा सामग्री:-

  • मिट्टी या बालू — शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाने के लिए
  • भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमा
  • बेलपत्र
  • धतूरा और उसके फूल
  • विभिन्न प्रकार के फूल और फूलमाला
  • फल और मिठाई/नैवेद्य
  • रोली, कुमकुम, हल्दी और अक्षत
  • चंदन
  • धूप, अगरबत्ती और दीपक
  • घी या तेल और रुई
  • कलश और शुद्ध जल/गंगाजल
  • नारियल
  • पंचामृत
  • पान, सुपारी आदि
  • इनके अलावा माता पार्वती को सोलह श्रृंगार अर्पित करने की परंपरा है। इसमें सिंदूर, बिंदी, चूड़ी, मेहंदी, काजल, चुनरी, बिछिया, पायल, कंघी, दर्पण आदि सुहाग की वस्तुएं शामिल की जा सकती हैं।

एक जरूरी बात:- हरतालिका तीज की पूजा सामग्री में क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। 


हरतालिका तीज 2026 पूजा विधि:-

हरतालिका तीज के दिन महिलाएं प्रातःकाल स्नान आदि करके व्रत का संकल्प लेती हैं। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूजा के दौरान व्रत कथा सुनना, मंत्र-जप करना और अंत में आरती करना शुभ माना जाता है।

हरतालिका तीज 2026 पूजा विधि:-

  • व्रत रखने वाली महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को साफ करके वहां चौकी या पूजा का स्थान तैयार करें। इसके बाद पूजा की सभी सामग्री व्यवस्थित रूप से रख लें।
  • पूजा शुरू करने से पहले भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करके हरतालिका तीज व्रत का संकल्प लें। मन में अपनी श्रद्धा और व्रत का उद्देश्य रखते हुए भगवान शिव-पार्वती से सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार के मंगल की प्रार्थना करें।
  • पूजा स्थल पर भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें। परंपरा के अनुसार हरतालिका तीज पर मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूजा करने का भी विशेष महत्व माना जाता है। साथ में भगवान गणेश की पूजा भी की जाती है।
  • इसके बाद भगवान शिव को जल, पंचामृत, बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित करें। माता पार्वती को कुमकुम, सिंदूर, फूल, फल और सुहाग की सामग्री अर्पित करें।
  • पूजा के दौरान हरतालिका तीज की पौराणिक कथा का श्रवण या वाचन करें। कथा में माता पार्वती की भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए की गई कठोर तपस्या और उनके अटूट संकल्प का वर्णन मिलता है। कथा सुनने के बाद भगवान शिव-पार्वती का स्मरण करें।
  • कथा के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें। इसके बाद उन्हें फल, मिठाई और अन्य नैवेद्य अर्पित करें तथा परिवार के सुख, समृद्धि और अखंड सौभाग्य की प्रार्थना करें।
  • हरतालिका तीज में श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखना तथा भगवान शिव-पार्वती का स्मरण करना सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। पूजा की विधि और सामग्री में स्थानीय एवं पारिवारिक परंपराओं के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है।

हरतालिका तीज का निर्जला व्रत: नियम और सावधानियां:-

हरतालिका तीज का व्रत कई महिलाएं निर्जल रखती हैं। निर्जला व्रत में अन्न और जल दोनों का त्याग किया जाता है तथा पूरा दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा, ध्यान और भक्ति में बिताने की परंपरा है। हालांकि निर्जला व्रत रखना अनिवार्य नहीं माना जाना चाहिए; अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य को ध्यान में रखना जरूरी है।

  • सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण किए जाते हैं।
  • भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करके व्रत का संकल्प लिया जाता है।
  • दिनभर अन्न और जल का त्याग करके भगवान शिव-पार्वती की पूजा की जाती है।
  • शिव-पार्वती को फूल, बेलपत्र, फल आदि अर्पित किए जाते हैं।
  • हरतालिका तीज की पौराणिक कथा का श्रवण या वाचन किया जाता है।
  • भजन-कीर्तन और भगवान शिव-पार्वती का स्मरण किया जाता है।
  • कई परंपराओं में रात में जागरण करके पूजा और भजन करने की मान्यता है।
  • अगले दिन पूजा के बाद अपनी परंपरा के अनुसार व्रत का पारण किया जाता है।
  • व्रत में क्या नहीं करना चाहिए?
  • व्रत के दौरान अन्न और जल ग्रहण करने से बचा जाता है, यदि निर्जला व्रत का संकल्प लिया गया हो।
  • क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से बचकर शांत मन से पूजा करनी चाहिए।
  • पूजा के दौरान भगवान शिव-पार्वती के प्रति श्रद्धा बनाए रखनी चाहिए।
  • व्रत को दिखावे या दूसरों से तुलना के रूप में नहीं रखना चाहिए।
  • स्वास्थ्य खराब होने पर जबरदस्ती निर्जला व्रत नहीं करना चाहिए। आवश्यकता होने पर जल या भोजन लेकर व्रत रखना अधिक उचित है।
  • निर्जला व्रत में लंबे समय तक पानी न पीने के कारण डिहाइड्रेशन और कमजोरी हो सकती है। गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों या किसी बीमारी से पीड़ित लोगों को बिना चिकित्सकीय सलाह के निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए।
  • “निर्जला व्रत धार्मिक आस्था और परंपरा का विषय है, लेकिन स्वास्थ्य से समझौता करना आवश्यक नहीं है। अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार व्रत का पालन करना चाहिए।”

हरतालिका तीज पर क्या करें और क्या न करें

हरतालिका तीज का व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित माना जाता है। इस दिन पूजा-पाठ के साथ मन की शुद्धता, श्रद्धा और संयम को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में व्रत के नियमों में थोड़ा अंतर हो सकता है।

हरतालिका तीज पर क्या करें और क्या न करें

हरतालिका तीज पर क्या करें?

  • सुबह स्नान करके स्वच्छ कपड़े पहनें और पूजा स्थल को साफ करें।
  • भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करें।
  • पूजा में बेलपत्र, फूल, फल, धूप, दीप और नैवेद्य आदि अर्पित करें।
  • माता पार्वती को सिंदूर और सुहाग की सामग्री अर्पित करें।
  • हरतालिका तीज की पौराणिक कथा का श्रवण या पाठ करें।
  • भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करके परिवार के सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
  • अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार भजन-कीर्तन और रात्रि जागरण कर सकते हैं।
  • व्रत रखने वाले लोग पूरे दिन संयम और श्रद्धा के साथ भगवान का स्मरण करें।

हरतालिका तीज पर क्या नहीं करना चाहिए?

  • पूजा के दौरान क्रोध, झगड़े और अपशब्दों से बचना चाहिए।
  • भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा में जल्दबाजी या लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
  • व्रत को केवल दिखावे या दूसरों से प्रतिस्पर्धा के लिए नहीं रखना चाहिए।
  • पूजा सामग्री या धार्मिक परंपराओं का अनादर नहीं करना चाहिए।
  • यदि निर्जला व्रत रखा है तो अपनी शारीरिक स्थिति पर ध्यान दें और अस्वस्थ महसूस होने पर जबरदस्ती व्रत जारी न रखें।
  • किसी दूसरे व्यक्ति के व्रत या पूजा-पद्धति का मजाक नहीं उड़ाना चाहिए।

पूजा संबंधी महत्वपूर्ण सावधानियां:-

  • हरतालिका तीज पर सबसे महत्वपूर्ण बात श्रद्धा और नियमपूर्वक पूजा करना है। पूजा की सामग्री और विधि में स्थानीय परंपरा के अनुसार अंतर हो सकता है, इसलिए किसी एक क्षेत्र की परंपरा को सभी के लिए अनिवार्य नियम नहीं मानना चाहिए।
  • विशेष रूप से निर्जला व्रत के मामले में स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें। धार्मिक आस्था महत्वपूर्ण है, लेकिन बीमार, गर्भवती, बुजुर्ग या दवा लेने वाले व्यक्ति को व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

हरतालिका तीज व्रत का पारण कब और कैसे करें?

हरतालिका तीज का व्रत सामान्यतः एक दिन और एक रात की धार्मिक परंपरा से जुड़ा माना जाता है। व्रत रखने वाली महिलाएं तीज के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती हैं और अगले दिन पूजा के बाद व्रत का पारण करती हैं। पारण का समय स्थानीय पंचांग और परिवार की परंपरा के अनुसार निर्धारित करना बेहतर होता है।

हरतालिका तीज व्रत का पारण कब और कैसे करें?

हरतालिका तीज 2026 का व्रत 14 सितंबर, सोमवार को रखा जाएगा। इसके बाद 15 सितंबर 2026, मंगलवार को प्रातः स्नान करके भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है। पारण से पहले भगवान शिव-पार्वती को जल, फूल, फल और नैवेद्य अर्पित करके उनका आशीर्वाद लिया जाता है। इसके बाद अपनी परंपरा के अनुसार जल ग्रहण करके व्रत समाप्त किया जाता है। 

अगले दिन सुबह उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल पर भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करके दीपक जलाएं। इसके बाद फूल, बेलपत्र, फल और अन्य पूजा सामग्री अर्पित करें। भगवान शिव-पार्वती की आरती करें और अपने परिवार के सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें। पूजा पूर्ण होने के बाद ही व्रत का पारण करना उचित माना जाता है। पारण के समय शुरुआत हल्के भोजन या फल से करना बेहतर रहता है, खासकर यदि पूरे दिन निर्जला व्रत रखा गया हो।

ध्यान दें: पारण का सटीक समय अलग-अलग स्थानों और पंचांगों के अनुसार बदल सकता है। इसलिए Article में स्थानीय शहर के पंचांग के अनुसार पारण समय देना सबसे सही रहेगा।

हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का संयोग

  • वर्ष 2026 में 14 सितंबर का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष रहेगा, क्योंकि इसी दिन हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी दोनों पर्व मनाए जाएंगे। हरतालिका तीज पर महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर व्रत रखती हैं, जबकि गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश की स्थापना और पूजा की जाती है।
  • इस संयोग के कारण 14 सितंबर को शिव-पार्वती और भगवान गणेश की आराधना का विशेष अवसर रहेगा। हालांकि दोनों पर्व की पूजा-विधि और धार्मिक मान्यताएं अलग-अलग हैं, इसलिए Article में दोनों की पूजा को एक ही विधि न बताकर अलग-अलग समझाना बेहतर रहेगा।
  • “14 सितंबर 2026 को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का संयोग होने से इस दिन का धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।”


हरतालिका तीज FAQs

1.हरतालिका तीज 2026 कब है?

हरतालिका तीज 2026 में 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। यह व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है।

2.क्या कुंवारी लड़कियां हरतालिका तीज का व्रत रख सकती हैं?

हाँ। धार्मिक मान्यता के अनुसार अविवाहित लड़कियां भी हरतालिका तीज का व्रत रख सकती हैं। वे भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करके मनचाहे एवं योग्य जीवनसाथी की कामना करती हैं।

3.क्या हरतालिका तीज पर निर्जला व्रत रखना जरूरी है?

नहीं, इसे सभी के लिए अनिवार्य नहीं माना जाना चाहिए। परंपरा में निर्जला व्रत का विशेष महत्व है, लेकिन अपनी शारीरिक क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार व्रत रखना उचित है। अस्वस्थ व्यक्ति को जबरदस्ती निर्जला व्रत नहीं रखना चाहिए।

4.हरतालिका तीज के व्रत का पारण कब होता है?

सामान्य परंपरा के अनुसार 14 सितंबर को व्रत रखने के बाद 15 सितंबर 2026, मंगलवार को सुबह पूजा करने के बाद पारण किया जाता है। पारण का सटीक समय स्थानीय पंचांग और परंपरा के अनुसार अलग हो सकता है।

5.हरतालिका तीज पर किसकी पूजा होती है?

हरतालिका तीज पर मुख्य रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। पूजा में भगवान गणेश का भी स्मरण और पूजन किया जाता है। माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करने की परंपरा भी कई स्थानों पर है।

निष्कर्ष

हरतालिका तीज केवल एक व्रत नहीं, बल्कि भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम, विश्वास और समर्पण का पावन पर्व है। इस शुभ अवसर पर श्रद्धा और सच्चे मन से पूजा करें तथा अपने परिवार के सुख, शांति और समृद्धि की कामना करें। अगर आपको हमारा यह हरतालिका तीज 2026 का Article पसंद आया हो, तो इसे अपने दोस्तों और परिवार के साथ जरूर शेयर करें और हमारे Blog JeevanSetu को Follow करना न भूलें। साथ ही Comment करके बताएं कि आप अगले किस त्योहार के बारे में जानकारी पढ़ना चाहते हैं। आपके सुझाव हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

आप सभी को हरतालिका तीज 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं। 🙏

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