विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं तथा पीपल वृक्ष की पूजा करती हैं। सोमवार और अमावस्या का संयोग अत्यंत दुर्लभ और शुभ माना जाता है। सोमवार भगवान शिव को समर्पित होता है, जबकि अमावस्या पितरों के तर्पण और आध्यात्मिक साधना के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। जब ये दोनों शुभ अवसर एक साथ आते हैं, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि सोमवती अमावस्या को स्नान, दान, जप, तप और पूजा-अर्चना के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।
सोमवती अमावस्या 2026 कब है?
साल 2026 में सोमवती अमावस्या का विशेष संयोग दो बार बनेगा। जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तब उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। हिन्दू धर्म में इस दिन स्नान, दान, पितृ तर्पण और भगवान शिव तथा भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है।
पहली सोमवती अमावस्या 2026:-
- अमावस्या तिथि प्रारंभ- 14 जून 2026 को दोपहर लगभग 12:19 बजे
- अमावस्या तिथि समाप्त-15 जून 2026 को सुबह लगभग 08:24 बजे तक
- ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना शुभ माना जाता है।
- सूर्योदय के बाद पवित्र स्नान, दान और पीपल पूजा का विशेष महत्व है।
- भगवान शिव, भगवान विष्णु और पितरों का तर्पण करने का श्रेष्ठ समय प्रातःकाल माना जाता है।
दूसरी सोमवती अमावस्या 2026:-
- अमावस्या तिथि प्रारंभ-8 नवंबर 2026 को सुबह लगभग 11:27 बजे
- अमावस्या तिथि समाप्त-9 नवंबर 2026 को दोपहर लगभग 12:31 बजे तक
धार्मिक मान्यता के अनुसार सोमवती अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान, पीपल वृक्ष की पूजा, दान-पुण्य और पितरों का स्मरण करने से विशेष पुण्य फल प्राप्त होता है। विवाहित महिलाएं इस दिन अपने पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए व्रत भी रखती हैं।
सोमवती अमावस्या का महत्व
सोमवती अमावस्या हिन्दू धर्म में अत्यंत शुभ और पुण्यदायी मानी जाती है। जब अमावस्या तिथि सोमवार के दिन पड़ती है, तब यह विशेष संयोग बनता है जिसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। इस दिन स्नान, दान, व्रत, पूजा और पितरों का तर्पण करने का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किए गए शुभ कार्यों का फल कई गुना अधिक प्राप्त होता है।
- सोमवती अमावस्या का दिन भगवान शिव, भगवान विष्णु और पितरों की पूजा-अर्चना के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, मंत्र जाप करते हैं और पूजा-पाठ के माध्यम से ईश्वर की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति से की गई पूजा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाती है।
- हिन्दू धर्म में अमावस्या तिथि को पितरों की स्मृति और तर्पण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। सोमवती अमावस्या के दिन पितरों का तर्पण, श्राद्ध और दान करने से पितृ दोष के प्रभाव को कम करने में सहायता मिलती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन पितरों का आशीर्वाद प्राप्त करने से परिवार में सुख-समृद्धि और उन्नति बनी रहती है।
- सोमवती अमावस्या पर पवित्र नदी, सरोवर या गंगाजल युक्त जल से स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। स्नान के बाद अन्न, वस्त्र, तिल, फल और दक्षिणा का दान करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस दिन दान-पुण्य करने से व्यक्ति को पुण्य फल प्राप्त होता है तथा जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं।
- सोमवती अमावस्या का व्रत विशेष रूप से विवाहित महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और वैवाहिक सुख के लिए यह व्रत रखती हैं। पीपल वृक्ष की पूजा और परिक्रमा करने की भी परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन किया गया व्रत परिवार में सुख, शांति, प्रेम और समृद्धि बनाए रखने में सहायक माना जाता है।
सोमवती अमावस्या की पूजा विधि
सोमवती अमावस्या के दिन विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन स्नान, दान, मंत्र जाप और भगवान की आराधना करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और भक्ति भाव से की गई पूजा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लाती है।
- सोमवती अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना शुभ माना जाता है। स्नान से पहले भगवान का स्मरण करें और दिनभर के व्रत एवं पूजा का संकल्प लें।
- यदि संभव हो तो किसी पवित्र नदी, सरोवर या तीर्थ स्थल पर स्नान करें। यदि ऐसा संभव न हो तो घर में स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे शरीर और मन दोनों की शुद्धि होती है।
- स्नान के बाद तांबे के पात्र में जल लेकर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें। अर्घ्य देते समय सूर्य मंत्र का जाप करें और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
- सोमवती अमावस्या पर पीपल वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व है। पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करें, दीपक जलाएं और उसकी परिक्रमा करें। मान्यता है कि पीपल वृक्ष में भगवान विष्णु का वास होता है।
- इस दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव की विधिवत पूजा करें। भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले फूल और भोग अर्पित करें तथा भगवान शिव को जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाएं। पूजा के दौरान परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।
- पूजा स्थल, पीपल वृक्ष और घर के मंदिर में घी या तिल के तेल का दीपक जलाएं। दीपक जलाने से सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और वातावरण पवित्र बनता है।
- पीपल वृक्ष की श्रद्धापूर्वक परिक्रमा करें। कई स्थानों पर 108 परिक्रमा करने की परंपरा है, जबकि श्रद्धालु अपनी क्षमता और श्रद्धा के अनुसार भी परिक्रमा कर सकते हैं।
- पूजा के दौरान भगवान विष्णु और भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें। "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" तथा "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप अत्यंत शुभ माना जाता है। मंत्र जाप से मन को शांति मिलती है और आध्यात्मिक ऊर्जा बढ़ती है।
सोमवती अमावस्या व्रत नियम
सोमवती अमावस्या का व्रत हिन्दू धर्म में अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। इस दिन श्रद्धालु भगवान की आराधना, स्नान, दान और व्रत के माध्यम से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। व्रत के दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना आवश्यक माना गया है, जिससे व्रत का पूर्ण फल प्राप्त हो सके।
क्या खाएं और क्या नहीं:-
- व्रत के दौरान सात्विक और हल्का भोजन करना चाहिए। फल, दूध, दही, मखाना, सूखे मेवे, साबूदाना और व्रत में उपयोग होने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन किया जा सकता है। वहीं मांसाहार, मदिरा, प्याज, लहसुन और तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। व्रत के नियमों का पालन श्रद्धा और संयम के साथ करना शुभ माना जाता है।
- सोमवती अमावस्या के दिन सात्विक भोजन मन और शरीर की शुद्धता बनाए रखने में सहायक माना जाता है। सात्विक आहार से सकारात्मक विचारों का विकास होता है और पूजा-पाठ में मन एकाग्र रहता है। कई श्रद्धालु इस दिन केवल फलाहार करते हैं, जबकि कुछ लोग निर्जल या केवल जल ग्रहण कर व्रत रखते हैं।
- व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य, संयम और सदाचार का पालन करना चाहिए। मन, वचन और कर्म से पवित्र रहने का प्रयास करें। क्रोध, झूठ, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार संयम और आत्मनियंत्रण से व्रत का पुण्य फल बढ़ता है।
- सोमवती अमावस्या पर दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन अन्न, वस्त्र, तिल, फल, जल और धन का दान करना शुभ माना जाता है। जरूरतमंद लोगों की सहायता करने से पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। पितरों की शांति और ईश्वर की कृपा प्राप्त करने के लिए भी दान को महत्वपूर्ण माना गया है।
- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा, भक्ति और नियमपूर्वक रखा गया सोमवती अमावस्या का व्रत व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त करता है।
इस दिन क्या दान करें?
सोमवती अमावस्या के दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है तथा पितरों की कृपा प्राप्त होती है। आइए जानते हैं कि सोमवती अमावस्या पर किन वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है।
काला तिल का दान:-
सोमवती अमावस्या पर काले तिल का दान अत्यंत शुभ माना जाता है। हिन्दू धर्म में तिल को पवित्र माना गया है और इसका संबंध पितरों की शांति से भी जोड़ा जाता है। काले तिल का दान करने से पितृ दोष के प्रभाव को कम करने में सहायता मिलने की मान्यता है।
वस्त्र का दान:-
गरीब और जरूरतमंद लोगों को वस्त्र दान करना पुण्यदायी माना जाता है। विशेष रूप से स्वच्छ और उपयोगी वस्त्र दान करने से समाज सेवा के साथ-साथ धार्मिक लाभ भी प्राप्त होता है।
अन्न का दान:-
अन्नदान को सभी दानों में श्रेष्ठ माना गया है। सोमवती अमावस्या के दिन अनाज, चावल, गेहूं, दाल या अन्य खाद्य सामग्री का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि अन्नदान करने से जीवन में सुख और समृद्धि बढ़ती है।
जल से भरा घड़ा दान करें:-
गर्मी के मौसम में जल से भरा घड़ा दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्यासे लोगों को जल उपलब्ध कराना महान पुण्य का कार्य है। इस दिन जल, घड़ा या शीतल पेय पदार्थों का दान करने से विशेष फल प्राप्त होने की मान्यता है।
गरीबों को भोजन कराएं:-
सोमवती अमावस्या पर जरूरतमंद, गरीब और असहाय लोगों को भोजन कराना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। भोजन दान से न केवल मानव सेवा होती है बल्कि ईश्वर की कृपा भी प्राप्त होती है। श्रद्धा और सम्मान के साथ कराया गया भोजन दान विशेष फलदायी माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोमवती अमावस्या पर दान-पुण्य करने से पितरों की शांति, परिवार की सुख-समृद्धि और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
पीपल पूजा का महत्व
सोमवती अमावस्या के दिन पीपल वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। हिन्दू धर्म में पीपल को अत्यंत पवित्र वृक्ष माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीपल वृक्ष में भगवान विष्णु का वास होता है तथा इसमें सभी देवी-देवताओं का निवास माना जाता है। इसलिए सोमवती अमावस्या पर पीपल पूजा करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
पीपल वृक्ष की मान्यता:-
शास्त्रों के अनुसार पीपल वृक्ष को देववृक्ष कहा गया है। मान्यता है कि पीपल की पूजा करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है और जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं। सोमवती अमावस्या के दिन पीपल वृक्ष पर जल अर्पित करना, दीपक जलाना और उसकी पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
कितनी परिक्रमा करें?
सोमवती अमावस्या पर पीपल वृक्ष की परिक्रमा करने की विशेष परंपरा है। कई स्थानों पर 108 परिक्रमा करने की मान्यता है, जबकि कुछ श्रद्धालु 11, 21, 51 या अपनी श्रद्धा एवं क्षमता के अनुसार परिक्रमा करते हैं। विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु और परिवार की खुशहाली के लिए पीपल वृक्ष की परिक्रमा करती हैं।
पूजा का सही तरीका:-
1. प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
2. पीपल वृक्ष के पास जाकर जल अर्पित करें।
3. वृक्ष की जड़ में दीपक जलाएं।
4. रोली, अक्षत और पुष्प अर्पित करें।
5. भगवान विष्णु और पितरों का स्मरण करें।
6. श्रद्धापूर्वक पीपल वृक्ष की परिक्रमा करें।
7. पूजा के दौरान "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप करें।
8. अंत में परिवार की सुख-समृद्धि और पितरों की शांति की प्रार्थना करें।
धार्मिक मान्यता के अनुसार सोमवती अमावस्या पर विधिपूर्वक पीपल पूजा करने से पुण्य फल प्राप्त होता है, पितरों का आशीर्वाद मिलता है तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
सोमवती अमावस्या के दिन क्या करें और क्या नहीं?
सोमवती अमावस्या का दिन स्नान, दान, पूजा-पाठ और पितरों के स्मरण के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन कुछ विशेष कार्य करने से पुण्य फल प्राप्त होता है, वहीं कुछ कार्यों से बचने की भी सलाह दी जाती है। आइए जानते हैं कि सोमवती अमावस्या पर क्या करना चाहिए और किन बातों से बचना चाहिए।
क्या करें:-
- सोमवती अमावस्या के दिन प्रातःकाल स्नान करके दान-पुण्य अवश्य करें। पवित्र नदी में स्नान करना या घर पर गंगाजल युक्त जल से स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद अन्न, वस्त्र, तिल, फल या धन का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
- इस दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव के मंत्रों का जाप करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। "ॐ नमः शिवाय" और "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
- अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित मानी जाती है। इसलिए इस दिन पितरों का तर्पण, स्मरण और उनके नाम से दान करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
क्या नहीं करें:-
- सोमवती अमावस्या के दिन मांसाहार, मदिरा, लहसुन, प्याज और अन्य तामसिक भोजन से दूर रहना चाहिए। इस दिन सात्विक भोजन और शुद्ध आचरण को महत्व दिया जाता है।
- व्रत और पूजा के दौरान मन को शांत रखना चाहिए। झूठ बोलना, विवाद करना, क्रोध करना और किसी का अपमान करना शुभ नहीं माना जाता। सकारात्मक विचार और संयम इस दिन के व्रत को सफल बनाते हैं।
- पीपल सहित किसी भी पेड़-पौधे को काटना या नुकसान पहुंचाना इस दिन अशुभ माना जाता है। प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति दया और सम्मान का भाव रखना चाहिए।
- सोमवती अमावस्या पर श्रद्धा, संयम और सदाचार का पालन करने से पूजा और व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है।
सोमवती अमावस्या मंत्र
सोमवती अमावस्या के दिन मंत्र जाप का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा और एकाग्रता के साथ मंत्रों का जाप करने से मन को शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है। इस दिन भगवान विष्णु, भगवान शिव तथा पितरों के लिए मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है।
"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय"
यह भगवान विष्णु का अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली मंत्र माना जाता है। इस मंत्र का जाप करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आगमन होता है। सोमवती अमावस्या के दिन इस मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है।
यह भगवान शिव का प्रसिद्ध पंचाक्षरी मंत्र है। इस मंत्र के जाप से मानसिक शांति, आत्मिक शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। मान्यता है कि भगवान शिव अपने भक्तों की सच्ची भक्ति से शीघ्र प्रसन्न होते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
"ॐ पितृभ्यः स्वधा नमः॥"
सोमवती अमावस्या पितरों के स्मरण और तर्पण के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। पितरों की शांति और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उपरोक्त मंत्र का जाप किया जा सकता है। इस मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करने से पितरों की कृपा प्राप्त होने तथा परिवार में सुख, शांति और समृद्धि आने की मान्यता है।
सोमवती अमावस्या के दिन मंत्र जाप करते समय मन को शांत और एकाग्र रखना चाहिए। स्नान, पूजा और दान के बाद मंत्रों का जाप करने से आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किया गया मंत्र जाप व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सहायक माना जाता है।
निष्कर्ष
सोमवती अमावस्या हिन्दू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी पर्व है। यह दिन स्नान, दान, व्रत, मंत्र जाप, पितृ तर्पण और ईश्वर की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ किए गए शुभ कार्यों से आध्यात्मिक उन्नति, मानसिक शांति और पुण्य फल की प्राप्ति होती है। सोमवती अमावस्या केवल धार्मिक अनुष्ठानों का अवसर ही नहीं, बल्कि परिवार में प्रेम, सद्भाव और सुख-समृद्धि बढ़ाने का भी संदेश देती है। इस दिन किया गया दान-पुण्य, पितरों का स्मरण और भगवान की उपासना व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने में सहायक माना जाता है। विशेष रूप से विवाहित महिलाएं अपने परिवार की खुशहाली और पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत रखती हैं।
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आशा है कि सोमवती अमावस्या 2026 से जुड़ी यह जानकारी आपके लिए उपयोगी रही होगी। यदि आपको यह लेख पसंद आया हो, तो इसे अपने मित्रों और परिवारजनों के साथ अवश्य साझा करें ताकि वे भी इस पावन पर्व के महत्व, पूजा विधि और व्रत नियमों के बारे में जान सकें। सोमवती अमावस्या 2026 की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। ईश्वर आपके जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करें।
## FAQ Section
Q1. सोमवती अमावस्या 2026 कब है?
सोमवती अमावस्या 2026 की पहली सोमवती अमावस्या 15 जून 2026, सोमवार को पड़ेगी। इस दिन अमावस्या तिथि और सोमवार का विशेष संयोग बनने के कारण इसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। श्रद्धालु इस दिन स्नान, दान, व्रत और पूजा-पाठ करते हैं।
Q2. सोमवती अमावस्या पर पीपल पूजा क्यों की जाती है?
हिन्दू धर्म में पीपल वृक्ष को अत्यंत पवित्र माना गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार पीपल में भगवान विष्णु का वास होता है। सोमवती अमावस्या के दिन पीपल वृक्ष की पूजा, जल अर्पण और परिक्रमा करने से पुण्य फल प्राप्त होता है तथा परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।
Q3. सोमवती अमावस्या में क्या दान करना चाहिए?
सोमवती अमावस्या के दिन काला तिल, अन्न, वस्त्र, जल से भरा घड़ा, फल तथा जरूरतमंद लोगों को भोजन का दान करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन दान-पुण्य करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सकारात्मकता आती है।
Q4. क्या महिलाएं सोमवती अमावस्या व्रत रख सकती हैं?
हाँ, महिलाएं सोमवती अमावस्या का व्रत रख सकती हैं। विशेष रूप से विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत रखती हैं। अविवाहित कन्याएं भी मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त करने की कामना से यह व्रत कर सकती हैं।
Q5. सोमवती अमावस्या पर कौन-सा मंत्र जपना सबसे शुभ माना जाता है?
सोमवती अमावस्या पर "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" और "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप अत्यंत शुभ माना जाता है। इन मंत्रों के जाप से मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और ईश्वर की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है।
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Q6. क्या सोमवती अमावस्या पर पितरों का तर्पण किया जाता है?
हाँ, सोमवती अमावस्या पितरों के तर्पण और स्मरण के लिए विशेष महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन तर्पण, श्राद्ध और दान-पुण्य करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलने की मान्यता है।
Q7. सोमवती अमावस्या पर कितनी परिक्रमा करनी चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीपल वृक्ष की 108 परिक्रमा करना शुभ माना जाता है। हालांकि श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार 11, 21 या 51 परिक्रमा भी कर सकते हैं।
Q8. क्या सोमवती अमावस्या पर व्रत में नमक खा सकते हैं?
व्रत रखने वाले श्रद्धालु सामान्य नमक की जगह सेंधा नमक का सेवन कर सकते हैं। कई लोग केवल फलाहार करके भी यह व्रत रखते हैं।
Q9. सोमवती अमावस्या पर किन देवताओं की पूजा की जाती है?
इस दिन मुख्य रूप से भगवान विष्णु, भगवान शिव और पितरों का पूजन किया जाता है। साथ ही पीपल वृक्ष की पूजा का भी विशेष महत्व माना जाता है।
Q10. सोमवती अमावस्या का व्रत रखने से क्या लाभ होता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस व्रत को रखने से परिवार में सुख-शांति, वैवाहिक जीवन में मधुरता, पितरों का आशीर्वाद और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।
आर्टिकल पढ़ने के लिए धन्यवाद
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