दीपावली के बाद मनाया जाने वाला गोवर्धन पूजा का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह त्योहार भगवान श्रीकृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गौमाता की पूजा को समर्पित है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों और गायों की रक्षा के लिए अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठाया था। इसी घटना की याद में हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का पर्व मनाया जाता है।
यह भी पढ़े......................मकर संक्रांति 2027: पूजा, स्नान-दान और पौराणिक कथासाल 2026 में गोवर्धन पूजा की तारीख को लेकर लोगों के बीच असमंजस है कि यह पर्व 9 नवंबर को मनाया जाएगा या 10 नवंबर को। इसका मुख्य कारण कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि का दोनों तारीखों के बीच पड़ना है। प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर को दोपहर में शुरू होकर 10 नवंबर को दोपहर में समाप्त होगी। इसलिए कुछ पंचांगों में 9 नवंबर की शाम पूजा का मुहूर्त दिया गया है, जबकि अन्य पंचांगों में 10 नवंबर की सुबह गोवर्धन पूजा का समय बताया गया है। सही दिन और मुहूर्त निर्धारित करने के लिए स्थानीय पंचांग तथा पूजा की परंपरा को ध्यान में रखना जरूरी है।
गोवर्धन पूजा 2026 की तिथि और दिन
गोवर्धन पूजा 2026 की तारीख और मुहूर्त को समझने के लिए कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि की जानकारी महत्वपूर्ण है। दिल्ली और जयपुर के लिए उपलब्ध पंचांगों में पूजा की तारीख अलग-अलग बताई गई है। जयपुर के पंचांग में गोवर्धन पूजा 9 नवंबर, सोमवार को दी गई है, जबकि दिल्ली के पंचांग में 10 नवंबर, मंगलवार को पूजा का दिन बताया गया है।
- गोवर्धन पूजा की तारीख: 9 या 10 नवंबर 2026, स्थानीय पंचांग के अनुसार
- वार: 9 नवंबर को सोमवार और 10 नवंबर को मंगलवार
- प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: 9 नवंबर 2026 को दोपहर 12:31 बजे
- प्रतिपदा तिथि समाप्त: 10 नवंबर 2026 को दोपहर 2:00 बजे
ये तिथि-समय दिल्ली और जयपुर के लिए प्रकाशित पंचांग विवरण पर आधारित हैं। आपके शहर में स्थानीय गणना के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है।
गोवर्धन पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त
गोवर्धन पूजा के लिए सुबह और शाम के मुहूर्त का महत्व स्थानीय पंचांग में तिथि की स्थिति के आधार पर तय किया जाता है। दिल्ली के लिए उपलब्ध पंचांग के अनुसार, 10 नवंबर 2026 को सुबह 6:40 बजे से 8:50 बजे तक गोवर्धन पूजा का प्रातःकालीन शुभ मुहूर्त रहेगा। इसकी अवधि लगभग 2 घंटे 10 मिनट है। वहीं, जयपुर के पंचांग में 9 नवंबर 2026 को शाम 3:28 बजे से 5:39 बजे तक गोवर्धन पूजा का सायंकालीन मुहूर्त दिया गया है। इसकी अवधि भी लगभग 2 घंटे 11 मिनट है।
इसलिए पूजा करने से पहले अपने शहर के पंचांग में दिया गया मुहूर्त जरूर देख लें। पूजा के लिए पूरा निर्धारित समय उपलब्ध हो तो उसी अवधि में गोवर्धन भगवान की पूजा, अन्नकूट का भोग और गौपूजन किया जा सकता है। मुहूर्त की पूरी अवधि में पूजा करना अनिवार्य नहीं है; श्रद्धालु निर्धारित शुभ समय के भीतर अपनी सुविधा और पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा कर सकते हैं।
पूजा के समय में स्थानीय अंतर क्यों होता है?
हिंदू पंचांग में तिथि की गणना चंद्रमा की गति के आधार पर होती है, जबकि धार्मिक पर्वों के लिए सूर्योदय, दिन के विशेष काल और तिथि के नियम भी देखे जाते हैं। इसी कारण अलग-अलग शहरों या पंचांगों में गोवर्धन पूजा की तारीख और शुभ समय में अंतर दिखाई दे सकता है। यदि आप राजस्थान में पूजा कर रहे हैं, तो अपने शहर के स्थानीय पंचांग से अंतिम समय की पुष्टि करें।
गोवर्धन पूजा की पौराणिक कथा
गोवर्धन पूजा की पौराणिक कथा भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और देवराज इंद्र के अभिमान से जुड़ी हुई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में ब्रजभूमि के लोग वर्षा और अच्छी फसल के लिए देवराज इंद्र की पूजा किया करते थे। एक बार जब दीपावली के बाद इंद्र पूजा की तैयारियां चल रही थीं, तब भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों से पूछा कि वे इंद्र देव की पूजा क्यों करते हैं। श्रीकृष्ण ने समझाया कि ब्रजवासियों के जीवन में गोवर्धन पर्वत, गायों और प्रकृति का विशेष योगदान है। गोवर्धन पर्वत से पशुओं को चारा मिलता है और प्राकृतिक संसाधनों से लोगों की आजीविका चलती है। इसलिए सभी को गोवर्धन पर्वत की पूजा करके प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करना चाहिए।
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ब्रजवासियों द्वारा इंद्र पूजा की तैयारी
पौराणिक कथा के अनुसार, ब्रज में इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए विशेष पूजा और भोग की तैयारियां की जा रही थीं। ब्रजवासी मानते थे कि इंद्र देव की कृपा से वर्षा होती है, जिससे खेतों में अच्छी फसल पैदा होती है और पशुओं के लिए पर्याप्त चारा मिलता है। इसी कारण वे हर वर्ष इंद्र पूजा का आयोजन करते थे। जब भगवान श्रीकृष्ण ने इन तैयारियों को देखा, तो उन्होंने ब्रजवासियों को प्रकृति और गोवर्धन पर्वत के महत्व के बारे में समझाया।
श्रीकृष्ण द्वारा गोवर्धन पूजा का सुझाव
भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों से कहा कि उन्हें गोवर्धन पर्वत की पूजा करनी चाहिए, क्योंकि यह पर्वत उनके जीवन और आजीविका का महत्वपूर्ण आधार है। श्रीकृष्ण की बात मानकर ब्रजवासियों ने इंद्र पूजा के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा की। उन्होंने अनेक प्रकार के पकवान बनाए और भगवान श्रीकृष्ण तथा गोवर्धन पर्वत को अन्नकूट का भोग अर्पित किया। इस प्रकार ब्रज में गोवर्धन पूजा की परंपरा का विशेष महत्व स्थापित हुआ।
इंद्र देव ने ब्रज में कराई मूसलाधार वर्षा
जब देवराज इंद्र को पता चला कि ब्रजवासियों ने उनकी पूजा नहीं की है, तो वे क्रोधित हो गए। अपने अभिमान में आकर उन्होंने ब्रजभूमि में मूसलाधार वर्षा कराने का आदेश दिया। देखते ही देखते तेज बारिश और तूफान से पूरे ब्रज में संकट उत्पन्न हो गया। घरों में पानी भरने लगा और लोग अपने परिवारों तथा गायों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हो गए। सभी ब्रजवासी भगवान श्रीकृष्ण से सहायता की प्रार्थना करने लगे।
श्रीकृष्ण ने छोटी उंगली पर उठाया गोवर्धन पर्वत
ब्रजवासियों को संकट में देखकर भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर विशाल गोवर्धन पर्वत उठा लिया। उन्होंने सभी लोगों और गायों को पर्वत के नीचे शरण लेने के लिए कहा। धार्मिक कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने सात दिनों तक गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर धारण किए रखा और सभी ब्रजवासियों की रक्षा की। अंततः देवराज इंद्र को अपनी गलती और अभिमान का एहसास हुआ। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की दिव्यता को स्वीकार किया और वर्षा रोक दी।
इस पौराणिक कथा से यह संदेश मिलता है कि अहंकार करने के बजाय विनम्रता अपनानी चाहिए और प्रकृति का सम्मान करना चाहिए। इसी मान्यता के कारण हर वर्ष गोवर्धन पूजा पर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की जाती है, गोवर्धन पर्वत की पूजा होती है और अन्नकूट का भोग लगाया जाता है।
गोवर्धन पूजा 2026 से जुड़े सवाल-जवाब (FAQ)
1. गोवर्धन पूजा 9 या 10 नवंबर 2026 को है?
साल 2026 में गोवर्धन पूजा की तारीख को लेकर अलग-अलग पंचांगों में अंतर दिखाई दे रहा है। कुछ पंचांगों के अनुसार गोवर्धन पूजा 9 नवंबर 2026, सोमवार को मनाई जाएगी, जबकि उदया तिथि के आधार पर कई पंचांगों में 10 नवंबर 2026, मंगलवार की तारीख दी गई है। प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर को दोपहर लगभग 12:31 बजे शुरू होकर 10 नवंबर को दोपहर लगभग 2 बजे समाप्त होगी। इसलिए पूजा की सही तारीख तय करने के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग और पूजा परंपरा को देखना उचित है।
2. वर्ष 2026 में गोवर्धन पूजा किस दिन है?
गोवर्धन पूजा 2026 में सोमवार, 9 नवंबर को या मंगलवार, 10 नवंबर को मनाए जाने को लेकर पंचांगों में मतभेद है। राष्ट्रीय पंचांग में 9 नवंबर की तारीख दी गई है, जबकि कुछ क्षेत्रीय पंचांग 10 नवंबर को पूजा का दिन मानते हैं। इसका मुख्य कारण कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा तिथि का दोनों दिनों में पड़ना है। अपने क्षेत्र में प्रचलित पंचांग के अनुसार पूजा करना बेहतर रहेगा।
3. गोवर्धन पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त क्या है?
गोवर्धन पूजा का शुभ मुहूर्त शहर और स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग-अलग हो सकता है। उदाहरण के लिए, इंदौर में 9 नवंबर 2026 को सायंकालीन पूजा का मुहूर्त दोपहर 3:31 बजे से शाम 5:45 बजे तक दिया गया है। वहीं कुछ पंचांग 10 नवंबर को सुबह पूजा का समय बताते हैं। इसलिए पूजा करने से पहले अपने शहर के अनुसार मुहूर्त की पुष्टि अवश्य करें।
4. क्या घर पर गोवर्धन पूजा कर सकते हैं?
हां, गोवर्धन पूजा घर पर आसानी से की जा सकती है। इसके लिए घर के आंगन या किसी साफ स्थान पर गोबर अथवा मिट्टी से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएं। इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण का स्मरण करके जल, रोली, अक्षत और फूल अर्पित करें। दीपक जलाएं, सात्त्विक पकवानों का भोग लगाएं और आरती करें। पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा, स्वच्छता और अपने परिवार की परंपरा का पालन करना है।
5. गोवर्धन पूजा पर अन्नकूट कब बनाया जाता है?
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अन्नकूट सामान्यतः गोवर्धन पूजा के दिन बनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह आयोजन स्थानीय पंचांग के अनुसार 9 या 10 नवंबर को हो सकता है। अन्नकूट में विभिन्न प्रकार की सब्जियां, अनाज, चावल, पूड़ी, मिठाइयां और अन्य सात्त्विक पकवान तैयार किए जाते हैं। इन व्यंजनों को भगवान श्रीकृष्ण को भोग के रूप में अर्पित किया जाता है। कई मंदिरों में इस अवसर पर विशेष अन्नकूट उत्सव और प्रसाद वितरण भी किए जाते हैं।
6. गोवर्धन पूजा और अन्नकूट में क्या संबंध है?
गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का गहरा धार्मिक संबंध है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने ब्रजवासियों को गोवर्धन पर्वत की पूजा करने और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का संदेश दिया था। इसी परंपरा में श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण को अनेक प्रकार के पकवानों का भोग लगाते हैं, जिसे अन्नकूट कहा जाता है। अन्नकूट का अर्थ विभिन्न खाद्य पदार्थों के समूह से है। यह उत्सव अन्न के सम्मान, प्रकृति के प्रति कृतज्ञता और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति भक्ति का प्रतीक माना जाता है।
अतः इस पावन पर्व पर हमें पूर्ण श्रद्धा, स्वच्छता और सात्विक भाव से मां भगवती का स्वागत करना चाहिए और उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को ज्ञान, भक्ति और खुशहाली से आलोकित करना चाहिए। अगर आपको जीवनसेतु की तरफ से दी गई जानकारी पसंद आई है तो हमारे ब्लॉग को फॉलो करें और हमें कमेंट में लिखे की आप अब आगे किस त्यहार के बारे में जानना चाहत्ते है
जीवनसेतु की ओर से धन्यवाद





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गोवर्धन पूजा 2026: 9 या 10 नवंबर? जानें सही तिथि, मुहूर्त और पूजा विधि
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